आरटीआई अधिनियम अवलोकन
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 — एक विस्तृत परिचय
आरटीआई क्या है?
सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 भारत की संसद द्वारा पारित एक ऐतिहासिक कानून है जो प्रत्येक नागरिक को सरकारी सूचना तक पहुंच का अधिकार देता है। यह अधिनियम पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।
अधिनियम के उद्देश्य
पारदर्शिता
सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना और नागरिकों को सूचित करना।
जवाबदेही
सार्वजनिक प्राधिकरणों को नागरिकों के प्रति जवाबदेह बनाना।
भ्रष्टाचार उन्मूलन
सूचना की स्वतंत्र पहुंच से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना।
लोकतंत्र को सशक्त बनाना
एक सूचित लोकतंत्र के लिए नागरिकों को सशक्त बनाना।
मुख्य प्रावधान
| धारा | विवरण |
|---|---|
| धारा 6 | आवेदन प्रक्रिया — लिखित या इलेक्ट्रॉनिक रूप में, हिंदी, अंग्रेजी या स्थानीय भाषा में |
| धारा 7 | 30 दिनों के भीतर सूचना देने का दायित्व (जीवन-मृत्यु से संबंधित: 48 घंटे) |
| धारा 8 | सूचना देने से छूट — राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यक्तिगत गोपनीयता, तृतीय पक्ष जानकारी |
| धारा 19 | अपील प्रक्रिया — PIO के उत्तर से असंतुष्ट होने पर प्रथम/द्वितीय अपील |
| धारा 20 | दंड का प्रावधान — सूचना न देने पर ₹250/दिन (अधिकतम ₹25,000) जुर्माना |
| धारा 4(1)(b) | स्वतः प्रकटीकरण — 17 श्रेणियों में सूचना का स्वत: प्रकाशन अनिवार्य |
महत्वपूर्ण समय-सीमाएं
जीवन एवं स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में सूचना
सामान्य आवेदनों के लिए PIO द्वारा उत्तर
प्रथम अपील दाखिल करने की समय-सीमा (आदेश प्राप्ति से)
प्रथम अपील अधिकारी का निर्णय
द्वितीय अपील (सूचना आयुक्त के पास) दाखिल करने की समय-सीमा
छूट प्राप्त जानकारी
निम्नलिखित श्रेणियों की सूचनाएं आरटीआई अधिनियम की धारा 8 एवं 9 के अंतर्गत छूट प्राप्त हैं:
- ✕राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता या अखंडता को प्रभावित करने वाली सूचना
- ✕संसद या राज्य विधानमंडल की विशेषाधिकार का उल्लंघन
- ✕व्यक्तिगत गोपनीयता से संबंधित सूचना (जब तक सार्वजनिक हित न हो)
- ✕कैबिनेट कागजात और मंत्रिपरिषद की कार्यवाही
- ✕किसी व्यक्ति की व्यावसायिक गोपनीयता या बौद्धिक संपदा
- ✕न्यायालयों द्वारा प्रकटीकरण पर प्रतिबंधित जानकारी
